


बिहार के गया जिले की पहचान सिर्फ तिलकुट या पिंडदान भर नहीं है। यहां एक और बेहद स्वादिष्ट और पारंपरिक मिठाई बनाई जाती है—खोवा लाई। यह सर्दियों की खास मिठाई है, जिसे गया के स्थानीय कारीगर बहुत ही खास तरीके से तैयार करते हैं।
खोवा लाई क्या होती है?
खोवा लाई दो मुख्य चीज़ों से बनती है—
- खोवा (मावा) + लाई (फुले हुए चावल की बॉल)
- इन दोनों को गर्म चाशनी या गुड़ के साथ मिलाकर गाढ़े, नरम और हल्के मीठे गोले का रूप दिया जाता है।
- ये मिठाई बाहर से हल्की कुरकुरी और अंदर से बेहद मुलायम होती है।
गया की खोवा लाई इतनी प्रसिद्ध क्यों है?
- ताज़ा खोवा
गया में मिलने वाली खोवा लाई में बिल्कुल ताज़ा मावा इस्तेमाल किया जाता है। यही इसकी मिठास और नरमी का राज है।
- देसी गुड़ की चाशनी
गया के कई कारीगर गुड़ की चाशनी का इस्तेमाल करते हैं, जिससे लाई में देसी खुशबू और गाढ़ा स्वाद आता है।
- हाथ से बनाई जाने वाली मिठाई
लाई को चाशनी में मिलाने से लेकर गोल आकार देने तक सबकुछ हाथ से किया जाता है। यह पारंपरिक तरीका इसे खास और असली स्वाद देता है।
- हल्का और पचने में आसान
खोवा लाई ज्यादा मीठी नहीं होती। इसलिए यह बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के लिए सुरक्षित और पचने में आसान है।
खोवा लाई के प्रकार
गया में खोवा लाई आमतौर पर दो किस्मों में मिलती है:
1. चीनी वाली खोवा लाई
- हल्का स्वाद
- समुलायम और सफेद रंग
- ज्यादा लोकप्रिय
2. गुड़ वाली खोवा लाई
- देसी गुड़ का स्वाद
- सर्दियों में ज्यादा मांग
- स्वास्थ्य के लिए बेहतर
त्योहारी महत्व
मकर संक्रांति, संगत, और ठंड के महीनों में खोवा लाई को खास तौर पर बनाया जाता है।
गया और आसपास के ग्रामीण इलाकों में इसे शुभ और स्वास्थ्यवर्द्धक माना जाता है।
स्वास्थ्य लाभ
- मावा से मिलता है कैल्शियम और प्रोटीन
- गुड़ से मिलता है प्राकृतिक आयरन
- ठंड में शरीर को गर्म रखने में मदद
- हल्की मिठास, कम चाशनी
निष्कर्ष*
गया की खोवा लाई स्वाद, परंपरा और गुणवत्ता का सुंदर मिश्रण है।
एक बार जो भी इसे चखता है, वह इसके हल्के, देसी स्वाद को कभी नहीं भूलता।
अगर आप गया जा रहे हैं, तो वहाँ की ताज़ा बनी खोवा लाई जरूर खरीदें—यह बिहार की मिठास का असली स्वाद है।
